सरल शब्दों में
सी.टी.जी. (कार्डियोटोकोग्राफी) और एन.एस.टी. (नॉन-स्ट्रेस टेस्ट) में शिशु की धड़कन, उसकी हलचल और गर्भाशय के संकुचन एक ग्राफ़ पर दर्ज किए जाते हैं। पेट पर दो मुलायम पट्टियाँ लगाई जाती हैं। शरीर के अंदर कुछ नहीं डाला जाता और कोई सुई नहीं लगाई जाती।
यह किसके लिए है?
आमतौर पर गर्भावस्था के बाद के महीनों में और प्रसव के दौरान। यह तब भी सलाह दी जाती है जब शिशु की हलचल कम लगे, नियत तिथि निकल जाए, उच्च रक्तचाप या मधुमेह हो, या गर्भावस्था उच्च-जोखिम मानकर देखी जा रही हो।
परामर्श या जाँच में क्या होता है?
आप आराम से बैठती या लेटती हैं। पेट पर संवेदक लगी दो पट्टियाँ रखी जाती हैं। जब भी शिशु की हलचल महसूस हो, आप एक बटन दबाती हैं। रिकॉर्डिंग कुछ समय चलती है ताकि पूरा पैटर्न दर्ज हो सके।
कैसा महसूस हो सकता है?
कुछ भी अंदर नहीं डाला जाता और कोई सुई नहीं लगती। शिशु को सक्रिय करने के लिए आपको करवट बदलने या कुछ खाने-पीने को कहा जा सकता है। कपड़े पहने रहते हैं, केवल पेट खुला रखा जाता है।
आने से पहले
जब तक मना न किया गया हो, आने से पहले कुछ खा लें और शौचालय जाकर आएँ। अपना गर्भावस्था कार्ड और पिछले सभी काग़ात लाएँ। अगर शिशु की हलचल कम महसूस हुई है तो क्लिनिक को तुरंत बताएँ — इसमें इंतज़ार नहीं करना चाहिए।
परामर्श या जाँच के बाद
डा॰ शाज़िया ग्राफ़ देखकर उसी मुलाक़ात में आपको समझाती हैं। वह बताती हैं कि नियमित देखभाल जारी रखनी है, रिकॉर्डिंग दोबारा करनी है, या कुछ समय निगरानी में रहना है। यह रिकॉर्डिंग केवल शिशु की स्थिति की जाँच करती है। इससे शिशु का लिंग ज्ञात नहीं किया जाता। इस संस्थान में गर्भ में पल रहे शिशु के लिंग की जाँच कभी नहीं की जाती।
क्या साथ लाएँ?
- आने से पहले हल्का नाश्ता कर लें, शौचालय जाकर आएँ और अपना गर्भावस्था कार्ड साथ लाएँ
